कमर दर्द

कमर दर्द, पीठ दर्द (Back Pain or backache) या रीढ़ की हड्डी (Spinal pain) का दर्द किस कारण होता है?

काम से अकसर कमर दर्द (backache or Back Pain) के कारण छुट्टी लेना और अस्पताल जाकर का इलाज कराना एक सामान्य बात है। कभी कभी कमर का दर्द बहुत ज्यादा हो जाता है जो हमें असहज और दुर्बल कर सकता है।

कमर दर्द हमें किसी पुरानी चोट के कारण, खेल कूद के दौरान गिरने से, भार उठाने से या हमारी किसी पुरानी स्वास्थ्य समस्या के परिणामस्वरूप भी हो सकती है। इसलिए विभिन्न कारणों से कमर दर्द किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। जैसे-जैसे लोग बूढ़े होते हैं वैसे वैसे कमर के निचले हिस्से में दर्द होने की संभावना बढ़ जाती है जो की पुराने हमारे काम करने के तरीके और अपक्षयी डिस्क रोग (Degenerative Disk Disease) जैसे कारकों के कारण होती है।

कमर के निचले हिस्से में दर्द हमारे श्रीर के इन हिस्सों से जुड़ा हो सकता है – बोनी काठ का रीढ़ (bony lumbar spine), कशेरुकाओं के बीच डिस्क (discs between the vertebrae), रीढ़ के चारों ओर स्नायुबंधन और डिस्क (ligaments around the spine and discs), रीढ़ की हड्डी और नसों(spinal cord and nerves), पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों(lower back muscles), पेट और पैल्विक आंतरिक अंगों (bdominal and pelvic internal organs), और काठ का क्षेत्र के आसपास की त्वचा (skin around the lumbar area)।

ऊपरी कमर में दर्द (Back Pain or backache) महाधमनी के विकारों(disorders of the aorta), छाती में ट्यूमर(tumors in the chest) और रीढ़ की सूजन (spine inflammation) के कारण हो सकता है।

हमारी कमर की जटिल संरचना – मांसपेशियों, स्नायुबंधन(ligaments), Tendons, डिस्क और हड्डियों से होती है, जो शरीर को एक साथ काम करने में समर्थन करता है और पूरे शरीर को चारों ओर स्थानांतरित करने में सक्षम भी बनाता  हैं।

रीढ़ की हड्डी के जो छोटे छोटे हिस्से होते है उन हिस्सों को आपस में रगड़ने से बचने के लिए उपास्थि (cartilage  – like pads called disks) होती है जो इन खंडो के बीच में गद्दे का काम करती है।

इनमें से अगर एक भी घटक  अगर अपना काम करना बंद करदे या उसमे कोई दिक्कत आ जाये तो उसके कारण कमर दर्द हो सकती है।


रीढ़ की हड्डी के इन हिस्सों में नुकसान खिंचाव पड़ने से, हमारी चिकित्सा स्थिति और सही तरीके से न बैठना से भी हो सकता है।

खिंचाव

कमर दर्द आमतौर पर तनाव, झटके या चोट लगने से होता है। बार बार कमर दर्द होने के कारण हैं:

  • मांसपेशियों या स्नायुबंधन में खिंचाव
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • मांसपेशी में ज्यादा लचक आना या झटका लगना  
  • रीढ़ की हड्डी की क्षतिग्रस्त डिस्क से
  • कमर की चोट से, कमर की हड्डी टूटने से या कमर के भार पर गिरने से

 

वे गतिविधियाँ जिनसे कमर में खिंचाव या ऐंठन हो सकती है:

  • अनुचित तरीके से कुछ उठाना
    कुछ ऐसा उठाना जो बहुत भारी हो
    एकदम और अजीब ढंग से कमर को मोड़ने से
कमर दर्द (Back Pain or backache)

कमर दर्द के लिए शरीर रचना सम्बंधित समस्याएं

हमारे शरीर में अगर कोई शरीर रचना सम्बंधित समस्या आती है तो इन समस्याओं के कारण भी हमारी कमर में दर्द हो सकता है। जैसे की:-

टूटी हुई डिस्क हड्डी: रीढ़ में प्रत्येक कशेरुक डिस्क द्वारा कुशन (मुलायम परत) किया जाता है। यदि डिस्क फटती है तो तंत्रिका पर अधिक दबाव पड़ेगा, जिसके परिणामस्वरूप पीठ दर्द होगा।

अपने स्थान से बाहर निकला हुआ डिस्क: एक ही तरह से टूटी हुई डिस्क के रूप में, एक बाहर निकला हुआ या उभरा हुआ डिस्क हमारी तंत्रिकाओं पर अधिक दबाव बनता है जिससे हमें कमर दर्द हो सकता है।

कटिस्नायुशूल (sciatica) : एक तेज और चिलक की तरह होने वाला दर्द नितंब तंत्रिका के माध्यम से होता हुआ टांग के पिछले हिस्से तक जाता है जो एक तंत्रिका पर एक उभार के कारन या क्षतिग्रस्त डिस्क  के कारण होता है।

गठिया: ऑस्टियोआर्थराइटिस कूल्हों में जोड़ों के साथ, पीठ के निचले हिस्से और अन्य स्थानों पर समस्या पैदा कर सकता है। कुछ मामलों में, रीढ़ की हड्डी के चारों ओर का स्थान संकरा हो जाता है। इसे स्पाइनल स्टेनोसिस के रूप में जाना जाता है।

रीढ़ की असामान्य टेढ़ापन: यदि रीढ़ असामान्य तरीके से मुड़ता है, तो पीठ में दर्द हो सकता है। एक उदाहरण पार्श्वकुब्जता (स्कोलियोसिस) है, जिसमें रीढ़ की हड्डी का एक ओर झुकाव होता है।

हड्डियों को भुरना (ऑस्टियोपोरोसिस): रीढ़ की कशेरुका सहित हड्डियां भंगुर और छिद्रपूर्ण हो जाती हैं, जिससे दबाव के कारन हड्डियां टूटने लगती है और दर्द होता है।

किडनी की समस्या: किडनी में पथरी या किडनी में संक्रमण के कारण कमर दर्द हो सकता है।

शारीरिक हरकत और हमारे बैठने का तरीका

कमर दर्द भी हमारी कुछ रोजमर्रा की गतिविधियों, क्रियाकलापों या हमारे सही न बैठने के ढंग से हो सकती है।

उदाहरणों में शामिल:

  • अचानक मुड़ना या घूमना
  • खाँसना या छींकना
  • मांसपेशी का खिंचाव
  • ज्यादा खिंचाव
  • अजीब ढंग से या लंबे समय तक झुकना
  • धक्का देना, जोर से खींचना, उठाना
  • लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना
  • गर्दन और कमर को आगे की तरफ झुकाना जैसे – कि वाहन चलाते समय या कंप्यूटर का उपयोग करते समय
  • लम्बे समय तक बिना रुके गाड़ी चलना चाहे आपने गर्दन और कमर को आगे की तरफ न भी झुकाया हो 
  • ऐसे गद्दे पर सोना जो शरीर को आराम नहीं देता और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखता है

कमर दर्द के अन्य कारण

कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी कमर में दर्द हो सकता है।

कॉडा इक्विना सिंड्रोम: कॉडा इक्वाइन रीढ़ की हड्डी की जड़ों का एक बंडल है जो रीढ़ की हड्डी के निचले छोर से उत्पन्न होता है। इसके लक्षणों में पीठ के निचले हिस्से और ऊपरी नितंबों में एक मंद सा दर्द, साथ ही नितंबों, जननांगों और जांघों में सुन्नपन भी शामिल हो सकता है। कभी-कभी इसके कारण पेशाब और शौच करने में भी परेशानी होती है।
रीढ़ की हड्डी का कैंसर: रीढ़ की हड्डी में होने वाला कैंसर किसी भी एक नस को दबा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप पीठ में दर्द होता है।
रीढ़ की हड्डी का संक्रमण: रीढ़ की हड्डी का संक्रमण के कारण बुखार हो सकता है और जहां पर संक्रमण हुआ होगा जिस कारन से कमर में जलन और दर्द हो सकती है।
अन्य संक्रमण: श्रोणि सूजन की बीमारी (पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज), मूत्राशय या किडनी इंफेक्शन से भी कमर में दर्द हो सकता है।
नींद संबंधी विकार: नींद न आने की बीमारी वाले व्यक्तियों में पीठ के दर्द का अनुभव अन्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।
दाद: दाद एक संक्रमण है जो नसों को प्रभावित कर सकता है वह कमर दर्द का कारण हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि दाद से कौन सी नसें प्रभावित हुयी हैं।

कमर दर्द के जोखिम

कमर के निचले भाग में दर्द का विकास होने का जो मुख्य कारण है वो इस प्रकार से है:

  • व्यावसायिक गतिविधियाँ – ज्यादा यात्रायें करना इत्यादि
  • गर्भावस्था
  • एक गतिहीन जीवन शैली (जिस मे बहुत बैठने की आवश्यकता हो)
  • खराब शारीरिक फिटनेस
  • बड़ी उम्र
  • मोटापा और अतिरिक्त वजन
  • धूम्रपान
  • ज़ोरदार शारीरिक व्यायाम या काम, खासकर अगर गलत तरीके से किया गया हो
    आनुवंशिक या जेनेटिक कारक
  • चिकित्सा की स्थिति, जैसे गठिया और कैंसर
कमर के निचले हिस्से में दर्द पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम है, संभवतः हार्मोनल कारकों के कारण। तनाव, चिंता और मनोदशा संबंधी विकार भी कमर दर्द से जुड़े हुए हैं।

कमर दर्द लक्षण

कमर दर्द का मुख्य लक्षण कमर में कहीं भी दर्द और कभी-कभी दोनों कूल्हों से लेकर पैरों तक दर्द का होना।

कमर होने वाली कुछ समस्याओं के कारण कमर दर्द के अलावा ये दर्द शरीर की किसी और हिस्से में भी हो सकती ये निर्भर करता है की हमारी कमर में कौन सी नस दबी है और वह शरीर के किस भाग को प्रभावित कर रही है।

दर्द अक्सर इलाज के बिना भी चला जाता है, लेकिन अगर यह निम्न प्रकार के लोगों में से किसी के साथ होता है, तो उन्हें अपने डॉक्टर को देखना चाहिए:

  • वजन कम करने वाले व्यक्ति को
  • बुखार जिसको हुआ हो
  • सूजन या कमर पर सूजन
  • लगातार कमर दर्द, जहां लेटना या आराम करने से भी आराम न मिले
  • पैरों के नीचे दर्द
  • दर्द जो घुटनों से नीचे तक पहुंचता है
  • हाल की चोट, पीठ पर चोट या आघात
  • लगातार पेशाब आना
  • पेशाब करने में कठिनाई
  • बार बार दस्त या मल त्याग पर नियंत्रण न होना
  • जननांगों के आसपास सुन्नता
  • गुदा के आसपास सुन्नता
  • कूल्हे के आसपास सुन्नता

कमर दर्द के लिए डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है

यदि आपको अपने शरीर में कमर दर्द के साथ कोई सुन्नता या झुनझुनी का अनुभव होता है तो आपको जल्दी से जल्दी आपको चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए:

  • कमर का वो दर्द जो आराम करने से भी ठीक न हो और न इसमें सुधार हो
  • चोट या गिरावट के बाद का कमर दर्द
  • पैरों में सुन्नता के साथ कमर दर्द
  • कमजोरी के साथ कमर दर्द
  • बुखार के साथ कमर दर्द
  • वजन घटाने के साथ होने वाला कमर दर्द

कमर दर्द की सही पहचान कैसे होती है

एक डॉक्टर आमतौर पर आपसे कमर दर्द के लक्षणों के बारे में पूछेगा और फिर आपकी शारीरिक जांच करेगा उसके बाद आपकी कमर दर्द का निदान करने में वो सक्षम होगा।

  • आपकी कमर दर्द की सही जानकारी के लिए इमेजिंग स्कैन और अन्य परीक्षणों की आवश्यकता भी हो सकती है यदि:
  • पीठ दर्द एक चोट के परिणामस्वरूप दिखाई देता है
  • अंतर्निहित कारण भी हो सकता है जिसका तुरंत उपचार या सर्जरी की आवश्यकता हो
  • अगर आपका कमर दर्द काफी लम्बे समय से हो

एक्स-रे, एमआरआई, या सीटी स्कैन से पीठ में नरम ऊतकों के जख्म (soft tissues Injury) की स्थिति के बारे में जानकारी दे सकता है।

एक्स-रे हड्डियों की स्तिथि को दिखा सकते हैं और गठिया या टूटी हुई हड्डियों के संकेतों का पता लगा सकते हैं, लेकिन वे मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाओं या डिस्क में क्षति को सही से प्रकट नहीं कर सकते हैं।

एमआरआई या सीटी स्कैन हर्नियेटेड डिस्क या ऊतक, tendons, नसों, स्नायुबंधन, रक्त वाहिकाओं, मांसपेशियों और हड्डियों के साथ समस्याओं को प्रकट कर सकता है।

अस्थि स्कैन अस्थि ट्यूमर या ऑस्टियोपोरोसिस के कारण टूटी या भूरी हुयी हड्डियों का पता लगा सकते हैं। एक रेडियोएक्टिव पदार्थ या पता लगाने वाले  एक पदार्थ को एक नस में इंजेक्ट किया जाता है। ट्रेसर हड्डियों में इकट्ठा होता है और डॉक्टर को एक विशेष कैमरे की सहायता से हड्डी की समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है।

एलेट्रॉयोग्राफी या ईएमजी मांसपेशियों के जवाब में नसों द्वारा उत्पादित विद्युत आवेगों को मापता है। यह नसों की सिकुड़न की पुष्टि कर सकता है, जो हर्नियेटेड डिस्क या स्पाइनल दबाव के कारण हो सकता है।

संक्रमण का संदेह होने पर डॉक्टर रक्त परीक्षण का आदेश भी दे सकता है।

कमर दर्द की सही पहचान करने के अन्य तरीके

हड्डियों का वैद्य आपकी कमर को अपने हाथों से स्पर्श करके महसुस करेगा की आपको कमर दर्द क्यों हो रहा है और आपकी कमर को देख कर भी अंदाजा लगा सकता है। हड्डियों के वैद्य को उसकी हड्डियों से जुड़ी हुए सही जानकारी के लिए जाना जाता है क्यूंकि वह इतने सटीक या सही जानकारी सिर्फ आंखों से देख कर और हाथों से स्पर्श करके दे सकता है। परन्तु कभी कभी हड्डी का वैद्य भी इमेजिंग स्कैन (CT, MRI) और किसी भी रक्त और मूत्र परीक्षण के परिणामों को देखना चाह सकता है।

चोट मोच माहिर या विशेषज्ञ भी आपकी कमर को अपने हाथों से स्पर्श करके महसुस करेगा की आपको कमर दर्द क्यों हो रहा है। चोट मोच माहिर धीमी गति से और लयबद्ध खिंचाव शामिल होता है, जिसे गतिशीलता, दबाव या अप्रत्यक्ष तकनीकों और जोड़ों और मांसपेशियों के हेरफेर के रूप में जाना जाता है।

एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आपके शरीर के जोड़ों और कोमल ऊतकों (मास तंतु-Tissue) में समस्याओं के निदान पर ध्यान केंद्रित करता है।

पुरानी कमर दर्द या बहुत तेज कमर दर्द?

कमर दर्द को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:

  • तेज दर्द अचानक शुरू होता है और 6 सप्ताह तक रहता है।
  • पुरानी कमर दर्द या दीर्घकालिक कमर दर्द धीरे धीरे बढ़ता है यह 3 महीने से अधिक समय तक रहता है, और हमारी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।


यदि किसी व्यक्ति में अधिक तीव्र दर्द और कभी-कभी लगातार हल्के पीठ दर्द दोनों होते हैं, तो यह निर्धारित करना कठिन हो सकता है कि उन्हें तीव्र या पुरानी पीठ दर्द है या नहीं।

कमर दर्द का इलाज या उपचार

कमर दर्द आमतौर पर आराम करने से और घरेलू उपचार के साथ ठीक होता है, लेकिन कभी-कभी हमें चिकत्सीय इलाज की आवश्यक होती है।

कमर दर्द का घरेलू उपचार

ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दर्द निवारक दवा, आमतौर पर बिना स्टेरॉइड्स के सूजन को काम करके दर्द में आराम देने वाली दवाएं (NSAID), जैसे कि इबुप्रोफेन हमारी कमर दर्द की बेचैनी को दूर कर सकती हैं। दर्द वाले स्थान पर गर्म सेक या आइस पैक लगाने से भी कमर दर्द कम हो सकता है।

ज्यादा शारीरिक श्रम वाला काम बंद करके या शरीर को आराम दे कर भी कमर दर्द में रहत मिल सकती है, लेकिन हमें थोड़ा बहुत शरीर को हिलाते रहना चाहिए ताकि कमर दर्द भी कम होगा और मांसपेशियों को कमजोर होने से भी रोका जा सकेगा।

कमर दर्द का डॉक्टरी इलाज

यदि घरेलू उपचार से हमें कमर दर्द में राहत नहीं मिलती है तो डॉक्टर हमारी कमर दर्द को ठीक करने के लिए कुछ दवाइयाँ दे सकते है या फिर फिजियोथेरेपी करने के लिए बोल सकते है या इन दोनों तरीकों का उपयोग बता सकता है ।

दवाइयाँ: अगर कमर दर्द सामान्य दर्द निवारक दवाओं से ठीक नहीं होता है तो डॉक्टर हमें ज्यादा असरदायक दर्द निवारक दवाइयाँ लिख सकते है। एक निश्चित समय के लिए हमें ये दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से उनकी देखरेख में ही लेनी होती है। क्यूंकि इन दवाइयाँ में कुछ मादक पदार्थ होते है जिनका अधिक उपयोग करना सेहत के लिए हानिकारक होता है। कई बार कमर दर्द के लिए डॉक्टर मांसपेशियों में आराम (Muscle Relexant) दवाइयों का इस्तेमाल भी करते है।

फिजियोथेरेपी या फिजिकल थेरेपी

कमर दर्द को कम करने के लिए फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आपको गर्म पानी का सेक, बर्फ का ठंडा सेक, अल्ट्रासाउंड का सेक, और विद्युत उत्तेजना (Electric Stimulation) दे सकते है और इसके साथ ही पीठ की मांसपेशियों और कोमल ऊतकों (सॉफ्ट टिश्यू) को मसाज भी दे सकते है जो की आपकी कमर दर्द को कम कर सकता है।

जैसे ही आपकी कमर दर्द में सुधार होता है, फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आपको आपकी पीठ और पेट की मांसपेशियों के लिए कुछ व्यायाम बता सकता है जिससे धीरे धीरे आपकी कमर दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाएगी। इसके साथ साथ आपको अपने बैठने की मुद्रा में भी सुधार करना होता है जो आपको आपका फ़िज़ियोथेरेपिस्ट बता देगा।

रोगी को नियमित रूप से तकनीकों का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, भले ही दर्द चला गया हो ताकि फिर से कमर दर्द की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

कमर दर्द की रोकथाम

व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर की मसल ताकतवर बनती है और हमारे वजन को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। किसी के निर्देशन में की जाने वाली कम प्रभाव वाली एरोबिक (डांस इत्यादि) गतिविधियां कमर को बिना कोई तनाव या मरोड़े बिना हृदय स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दे सकती हैं। परन्तु किसी भी व्यायाम कार्यक्रम को शुरू करने से पहले, किसी स्वास्थ्य पेशेवर से बात जरूर करें और अगर आपको कोई भी स्वास्थ्य संबंधित समस्या हो तो जरूर बताएं।

दो मुख्य प्रकार के व्यायाम हैं जो लोग कमर दर्द के जोखिम को कम करने के लिए कर सकते हैं:

मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम:- मुख्य रूप से पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाले व्यायाम जिनसे कमर की रक्षा करने वाली मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
लचीला व्यायाम :- लचीलापन प्रशिक्षण का उद्देश्य हमारे शरीर के लचीलेपन में सुधार करना है, जिसमें रीढ़, कूल्हों और ऊपरी पैरों को शामिल करना है।

खान पान : हमें हमेशा ये सुनिश्चित करना है कि हमारे खाने में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी शामिल हैं, क्योंकि ये दोनों हमारी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक हैं। एक स्वस्थ आहार भी शरीर के वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है और हड्डियों से संबंधित कमर दर्द से सुरक्षा प्रदान करता है ।

धूम्रपान: धूम्रपान करने वालों में कमर दर्द, धूम्रपान न करने वालों के अपेक्षा में काफी अधिक होती है चाहे वो एक ही उम्र, ऊंचाई और वजन के क्यों न हो।

मोटापा या वजनी शरीर: वे लोग जिनका वजन अधिक होता है चाहे उनका पूरा शरीर मोटा हो या सिर्फ पेट या कूल्हे ही मोटे हो उनमे भी कमर दर्द का जोखिम सामान्य लोगों की अपेक्षा अधिक होता है। इसका मुख्य कारण उनका वजन ही होता है जिस कारण थोड़े से झटके से ही उनकी कमर की हाड़ियाँ और घुटने की हड्डियां भी हिल जाती है जो दर्द का कारण बनती है।

खड़े होने का तरीका : हमें हमेशा सीधे खड़े होना चाहिए जिसमे सिर स्थिर , पीठ सीधी और दोनों पैरों पर समान रूप से वजन हो । अपने पैरों को सीधा रखें और अपने सिर को अपनी रीढ़ हड्डी के अनुरूप रखें ताकि हम कमर दर्द से बच सकें ।

बैठने की मुद्रा / तरीका : जब भी हम ऑफिस में काम करने के लिए कुर्सी का चयन करते है तो हमें ध्यान रखना चाहिए की कुर्सी में हमारी कमर के लिए एक अच्छी बैक सपोर्ट हो इसके साथ साथ कुर्सी की आर्म रेस्ट और कुर्सी घूमने वाले आधार वाली होनी चाहिए ताकि हमें हर बार अपनी कमर को न मोड़ना पड़े क्यूंकि अचानक से मुड़ने पर भी कभी न कभी कमर दर्द से दो चार होना पड़ सकता है। यदि हम कंप्यूटर के कीबोर्ड का उपयोग करते है तो इस बात का ध्यान रखना जरूरी होता है की हमारी कोहनी समकोण पर हो और हमारे हाथों के अग्रभाग सीधे (Horizental) हों ।

वजन उठाना : चीजों को उठाते समय हमे अपनी पीठ के बजाय, हमे अपने पैरों का उपयोग करना चाहिए ताकि हमरी कमर में किसी भी तरह की जर्क न आ जाये ।

जूतों का चुनाव : कमर दर्द से बचने के लिए हमें समतल आधार वाले जुते पहनने चाहिए जिससे हमारी कमर में खींचाव न पड़े। ज्यादातर महिलाएं ऊँची एड़ी वाली सैंडल पहनती है जो एकदम गलत है, धीरे धीरे इससे भी हमें कमर दर्द हो जाती है।

ड्राइविंग: गाडी चलते समय हमें अपनी पीठ के लिए सही सहारा होना जरूरी है। हमें यह भी देखना चाहिए कि पीछे देखने का शीशा ठीक ढंग से सेट है ताकि हमें बार बार पीछे मुड़ कर न देखना पड़े । यदि हम अपनी लंबी यात्रा पर हैं, तो हर 90 से 120 किलोमेटर के बात रुकें जरूर।

बिस्तर: आपके पास एक गद्दा होना चाहिए जो आपकी रीढ़ को सीधा रखता है, जबकि एक ही समय में आपके कंधों और नितंबों के वजन का समर्थन करता है। एक तकिया का उपयोग करें, लेकिन वो ज्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए जो आपकी गर्दन को ज्यादा ऊँचा न उठा दे ।